हिंदी सिनेमा और साहित्य में “मृत्यु दिवस” पर कुछ बेहतरीन रचनाएँ मिलती हैं। फिल्म और ‘पीकू’ में मृत्यु और अंतिम संस्कार की रस्मों पर कसीदे कसते दृश्य हैं। कवि निराला की “सरोज स्मृति” और दूबे जी के व्यंग्य उस पाखंड को उजागर करते हैं जो इन दिनों से जुड़ा है।
उनकी याद में हमेशा दुआएं रहेंगी।
सर्व सम्मानित बंधुओं एवं परिवारजनों,
आज जी की बरसी है। आप सभी से प्रार्थना है कि अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए दो पल का समय निकालकर प्रार्थना करें।