हालाँकि यह युद्ध तकनीकी रूप से यूनानियों की हार थी, लेकिन इसने पूरे यूनान में जोश भर दिया। 300 स्पार्टन्स के बलिदान ने साबित कर दिया कि संख्या नहीं, बल्कि साहस और देशभक्ति युद्ध जीतने की असली कुंजी है। इसी प्रेरणा से एक साल बाद यूनानियों ने सलामिस के नौसैनिक युद्ध में फारसियों को करारी शिकस्त दी और यूनान को गुलामी से बचा लिया।
यद्यपि स्पार्टन्स यह युद्ध हार गए, लेकिन उनके इस बलिदान ने पूरे ग्रीस को एकजुट कर दिया। बाद में ग्रीक सेना ने फारस को हराकर अपनी आज़ादी की रक्षा की। 300 स्पार्टन्स की इस वीरता पर हॉलीवुड में नाम की एक मशहूर फिल्म भी बनी है, जिसने इस कहानी को आधुनिक युग में और भी लोकप्रिय बना दिया। निष्कर्ष
जब फारस की सेना आगे बढ़ रही थी, तब स्पार्टा में एक धार्मिक उत्सव चल रहा था, जिसके कारण पूरी सेना युद्ध पर नहीं जा सकती थी। राजा लियोनार्डस ने फैसला किया कि वे अपने के साथ दुश्मन को रोकेंगे। उनके साथ कुछ अन्य ग्रीक राज्यों के सैनिक भी थे, लेकिन मुख्य मोर्चा इन 300 योद्धाओं ने ही संभाला था।
जर्कसीज ने अपनी सेना को हमले का आदेश दिया, लेकिन स्पार्टन्स की मज़बूत ढालों और लंबी भालों (Spears) के सामने फारसी सैनिक टिक नहीं पाए। स्पार्टन्स ने 'फालानक्स' (Phalanx) फॉर्मेशन का इस्तेमाल किया, जिसे भेदना नामुमकिन था।
300 स्पार्टन्स की कहानी हमें सिखाती है कि । राजा लियोनार्डस और उनके योद्धाओं ने यह साबित कर दिया कि एक सच्चा योद्धा वह नहीं जो कभी हारता नहीं, बल्कि वह है जो अंतिम सांस तक हार नहीं मानता।