घर लौटते समय विवेक का अहंकार (Ego) टूट चुका था। उसने सीख लिया था कि देवी किसी एक स्थान पर कैद नहीं हैं। वे सर्वभूतेषु (सभी प्राणियों में) हैं। वह खुशी-खुशी अपनी पुस्तक (PDF) को अपने सीने से लगाकर ले गया, क्योंकि अब उसे हर इंसान, हर जानवर और हर प्रकृति में देवी दिखाई दे रही थीं।
या देवी सर्वभूतेषु जातिरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥ ya devi sarva bhuteshu in hindi pdf
"O Divine Mother, who resides in all beings as consciousness, salutations to You, salutations to You, salutations to You, again and again." salutations to You
यह कहानी PDF में बच्चों और बड़ों दोनों के लिए प्रेरणादायक होगी। ya devi sarva bhuteshu in hindi pdf
इसका अर्थ था: 'हे देवी! जो सभी प्राणियों में शक्ति के रूप में स्थित हैं, उन्हें मेरा प्रणाम है।'
या देवी सर्वभूतेषु श्रद्धारूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥
इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि: